AMAANAT - Hindi
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अमोल पालेकर: ए मेमॉयर भारत के सबसे प्रिय अभिनेताओं में से एक अमोल पालेकर की बेबाक आत्मकथा है। यह केवल उनके अभिनय और निर्देशन के सफर की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय रंगमंच, सिनेमा और टेलीविजन के विकास का एक जीवंत दस्तावेज भी है।
📖 पुस्तक के बारे में
अमोल पालेकर स्वयं को संयोग से अभिनेता, पसंद से निर्देशक और स्वभाव से चित्रकार मानते हैं। सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत चित्रकार के रूप में की, लेकिन सत्यदेव दुबे से मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और वे भारतीय समानांतर रंगमंच के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।
यह संस्मरण उनके रंगमंच के शुरुआती दिनों, अनिकेत थिएटर समूह की स्थापना, प्रयोगधर्मी नाटकों के मंचन और बाद में हिंदी, मराठी तथा बंगाली फिल्मों में अभिनेता के रूप में मिली अपार सफलता का विस्तार से वर्णन करता है। साथ ही, निर्देशक के रूप में उनकी संवेदनशील फिल्मों, साहित्यिक कृतियों के रूपांतरण और सामाजिक विषयों पर आधारित सिनेमा की यात्रा को भी सामने लाता है।
आत्मकथा भारतीय सिनेमा और थिएटर के बदलते स्वरूप, समानांतर सिनेमा के उदय, टेलीविजन के विकास और कला के प्रति लेखक के दृष्टिकोण को बेहद ईमानदारी और स्पष्टता के साथ प्रस्तुत करती है। यह केवल एक कलाकार की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक इतिहास की भी एक महत्वपूर्ण झलक है।
अभिनय, रंगमंच और सिनेमा के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा कला प्रेमियों के लिए यह पुस्तक एक प्रेरणादायक और महत्वपूर्ण संस्मरण है।
✨ मुख्य विशेषताएँ
- भारत के प्रतिष्ठित अभिनेता अमोल पालेकर की स्पष्ट और ईमानदार आत्मकथा।
- भारतीय रंगमंच, समानांतर सिनेमा और टेलीविजन के विकास का रोचक दस्तावेज।
- अभिनय, निर्देशन, चित्रकला और रचनात्मक जीवन की प्रेरक यात्रा।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्मों के निर्माण के पीछे की कहानी।
- सिनेमा, थिएटर और कला के विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी पुस्तक।
- भारतीय सांस्कृतिक इतिहास और रचनात्मक अभिव्यक्ति की अनमोल झलक।
✍️ लेखक के बारे में
अमोल पालेकर भारतीय सिनेमा, रंगमंच और टेलीविजन के प्रतिष्ठित अभिनेता, निर्देशक और निर्माता हैं। उनकी लोकप्रिय फिल्मों में गोल माल, चितचोर, रजनीगंधा, घरौंदा, रंग बिरंगी और छोटी सी बात शामिल हैं।
उन्होंने हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मों का निर्देशन किया है, जिनमें कैरी, अनकही, बांगरवाड़ी, दायरा और पहेली प्रमुख हैं। वर्ष 2006 में पहेली भारत की ओर से ऑस्कर पुरस्कार के लिए आधिकारिक प्रविष्टि भी रही। वे कच्ची धूप, मृगनयनी और कृष्णकली जैसे लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों के निर्देशक भी रहे हैं। वर्ष 2000 के बाद उन्होंने पुनः चित्रकला को अपना प्रमुख रचनात्मक माध्यम बनाया।
📚 यह पुस्तक क्यों पढ़ें?
अमोल पालेकर: ए मेमॉयर भारतीय सिनेमा और रंगमंच के एक स्वर्णिम दौर का प्रत्यक्ष साक्ष्य है। यदि आप फिल्मों, थिएटर, कला, आत्मकथाओं या भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक आपको एक महान कलाकार के जीवन, संघर्ष, रचनात्मक दृष्टि और भारतीय मनोरंजन जगत के विकास को बेहद करीब से समझने का अवसर देती है।

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