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Gaanv Se Bees Postcard

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गाँव के पोस्टकार्ड

📖 पुस्तक का परिचय

हम सबके अंदर थोड़ा-थोड़ा गाँव बसता है। हम जानें या न जानें, चाहें या न चाहें, हमारे रहन-सहन, हमारे खान-पान, हमारी भाषा-बोली, हमारे त्योहारों और हमारे व्यवहार में गाँव की झलक हमेशा दिखाई देती है।

गाँव वह दोस्त है जो हमेशा हमारे साथ खड़ा रहता है, लेकिन अक्सर उसकी गिनती नहीं होती। गाँव वह भाई है जो शादी के हर काम में सबसे आगे रहता है, लेकिन किसी तस्वीर में दिखाई नहीं देता। गाँव वह माँ है जिसके प्यार और संस्कारों की छाप हमारे पूरे जीवन पर रहती है, लेकिन जिसे हम कई बार सहज ही अपना मान लेते हैं।

समय के साथ हम शायद उसी गाँव को कहीं पीछे छोड़ आए हैं। गाँव के पोस्टकार्ड उसी भूले-बिसरे गाँव की यादों और अनुभवों का संग्रह है। ये पोस्टकार्ड 86 वर्षीय डॉ. शिव बालक मिसरा ने लिखे हैं—जो एक वैज्ञानिक भी हैं, किसान भी और शिक्षक भी।

देश और विदेश के अलग-अलग हिस्सों में रहने के बावजूद डॉ. मिसरा ने अपने दिल में अपने गाँव को हमेशा संजोकर रखा। यह पुस्तक भारत के हृदय में बसे उस गाँव का आईना है, जिसमें संघर्ष, सरलता, रिश्ते, संस्कार और जीवन की गहरी समझ दिखाई देती है।

✨ पुस्तक की विशेषताएं

  • गाँव के जीवन, संस्कृति और भावनाओं का आत्मीय चित्रण।
  • एक वैज्ञानिक और शिक्षक की नजर से भारत के ग्रामीण जीवन की झलक।
  • बचपन, मिट्टी, रिश्तों और संस्कारों से जुड़ी मार्मिक यादें।
  • नई पीढ़ी को गाँव की जड़ों और भारतीय संस्कृति से जोड़ने वाली पुस्तक।
  • संघर्ष, सेवा और समर्पण की प्रेरणादायक जीवन यात्रा।

✍️ लेखक परिचय

डॉ. शिव बालक मिसरा विश्व प्रसिद्ध भारतीय भू-वैज्ञानिक, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनका जन्म वर्ष 1939 में उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में हुआ। अपने 86 वर्षों के जीवन में उन्होंने गाँव के संघर्षपूर्ण लेकिन संतोषपूर्ण जीवन को करीब से अनुभव किया, खेती-किसानी की, विदेशों में भारत का नाम रोशन किया और दशकों तक एक लोकप्रिय शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

अपने बचपन के सपने को पूरा करते हुए उन्होंने गाँव में भारतीय ग्रामीण विद्यालय की स्थापना की और अपनी पत्नी निर्मला मिसरा के साथ मिलकर हजारों बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने का कार्य किया।

वर्ष 1967 में डॉ. मिसरा ने एडिएकरन फॉसिल्स (Ediacaran Fossils) नामक महत्वपूर्ण जीवाश्मों की खोज की, जो पृथ्वी पर जीवन के विकास को समझने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए। उनके द्वारा खोजे गए क्षेत्र को वर्ष 1984 में मिस्टेकन पॉइंट इकोलॉजिकल रिज़र्व के रूप में संरक्षित किया गया और वर्ष 2016 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

वर्ष 2007 में इन जीवाश्मों में से एक का नाम डॉ. मिसरा के सम्मान में Fractofusus misrai रखा गया।

वर्ष 1969 में अपने गाँव में विद्यालय स्थापित करने के उद्देश्य से डॉ. मिसरा कनाडा छोड़कर भारत लौट आए और ग्रामीण शिक्षा व समाज सेवा को अपना जीवन समर्पित किया।

📚 क्यों पढ़ें यह पुस्तक?

गाँव के पोस्टकार्ड सिर्फ यादों की किताब नहीं है, बल्कि यह भारत के ग्रामीण जीवन, संस्कारों और उस मिट्टी की कहानी है जिसने अनगिनत लोगों को आकार दिया है। यह पुस्तक पाठकों को अपनी जड़ों से जुड़ने और गाँव की अनमोल विरासत को समझने का अवसर देती है।

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