{"product_id":"rubber-the-social-and-natural-history-of-an-indispensable-substance","title":"AMAANAT - Hindi","description":"\u003cdiv style=\"font-family: Arial, Helvetica, sans-serif; line-height: 1.8; color: #333; max-width: 900px; margin: auto;\"\u003e\n\u003ch2 style=\"background: #6A1B9A; color: #ffffff; padding: 15px 20px; border-radius: 8px; text-align: center; margin-bottom: 20px;\"\u003eAMAANAT - Hindi\u003c\/h2\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eअमोल पालेकर: ए मेमॉयर\u003c\/strong\u003e भारत के सबसे प्रिय अभिनेताओं में से एक \u003cstrong\u003eअमोल पालेकर\u003c\/strong\u003e की बेबाक आत्मकथा है। यह केवल उनके अभिनय और निर्देशन के सफर की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय रंगमंच, सिनेमा और टेलीविजन के विकास का एक जीवंत दस्तावेज भी है।\u003c\/p\u003e\n\u003ch3 style=\"background: #2E7D32; color: #ffffff; padding: 12px 18px; border-radius: 6px;\"\u003e📖 पुस्तक के बारे में\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003eअमोल पालेकर स्वयं को \u003cstrong\u003eसंयोग से अभिनेता, पसंद से निर्देशक और स्वभाव से चित्रकार\u003c\/strong\u003e मानते हैं। सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत चित्रकार के रूप में की, लेकिन सत्यदेव दुबे से मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी और वे भारतीय समानांतर रंगमंच के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह संस्मरण उनके रंगमंच के शुरुआती दिनों, \u003cstrong\u003eअनिकेत\u003c\/strong\u003e थिएटर समूह की स्थापना, प्रयोगधर्मी नाटकों के मंचन और बाद में हिंदी, मराठी तथा बंगाली फिल्मों में अभिनेता के रूप में मिली अपार सफलता का विस्तार से वर्णन करता है। साथ ही, निर्देशक के रूप में उनकी संवेदनशील फिल्मों, साहित्यिक कृतियों के रूपांतरण और सामाजिक विषयों पर आधारित सिनेमा की यात्रा को भी सामने लाता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eआत्मकथा भारतीय सिनेमा और थिएटर के बदलते स्वरूप, समानांतर सिनेमा के उदय, टेलीविजन के विकास और कला के प्रति लेखक के दृष्टिकोण को बेहद ईमानदारी और स्पष्टता के साथ प्रस्तुत करती है। यह केवल एक कलाकार की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक इतिहास की भी एक महत्वपूर्ण झलक है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअभिनय, रंगमंच और सिनेमा के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा कला प्रेमियों के लिए यह पुस्तक एक प्रेरणादायक और महत्वपूर्ण संस्मरण है।\u003c\/p\u003e\n\u003ch3 style=\"background: #1565C0; color: #ffffff; padding: 12px 18px; border-radius: 6px;\"\u003e✨ मुख्य विशेषताएँ\u003c\/h3\u003e\n\u003cul\u003e\n\u003cli\u003eभारत के प्रतिष्ठित अभिनेता अमोल पालेकर की स्पष्ट और ईमानदार आत्मकथा।\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eभारतीय रंगमंच, समानांतर सिनेमा और टेलीविजन के विकास का रोचक दस्तावेज।\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eअभिनय, निर्देशन, चित्रकला और रचनात्मक जीवन की प्रेरक यात्रा।\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eराष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्मों के निर्माण के पीछे की कहानी।\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eसिनेमा, थिएटर और कला के विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी पुस्तक।\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eभारतीय सांस्कृतिक इतिहास और रचनात्मक अभिव्यक्ति की अनमोल झलक।\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\n\u003ch3 style=\"background: #8E24AA; color: #ffffff; padding: 12px 18px; border-radius: 6px;\"\u003e✍️ लेखक के बारे में\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eअमोल पालेकर\u003c\/strong\u003e भारतीय सिनेमा, रंगमंच और टेलीविजन के प्रतिष्ठित अभिनेता, निर्देशक और निर्माता हैं। उनकी लोकप्रिय फिल्मों में \u003cstrong\u003eगोल माल, चितचोर, रजनीगंधा, घरौंदा, रंग बिरंगी\u003c\/strong\u003e और \u003cstrong\u003eछोटी सी बात\u003c\/strong\u003e शामिल हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउन्होंने हिंदी, मराठी और अंग्रेज़ी में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मों का निर्देशन किया है, जिनमें \u003cstrong\u003eकैरी, अनकही, बांगरवाड़ी, दायरा\u003c\/strong\u003e और \u003cstrong\u003eपहेली\u003c\/strong\u003e प्रमुख हैं। वर्ष 2006 में \u003cstrong\u003eपहेली\u003c\/strong\u003e भारत की ओर से ऑस्कर पुरस्कार के लिए आधिकारिक प्रविष्टि भी रही। वे \u003cstrong\u003eकच्ची धूप, मृगनयनी\u003c\/strong\u003e और \u003cstrong\u003eकृष्णकली\u003c\/strong\u003e जैसे लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों के निर्देशक भी रहे हैं। वर्ष 2000 के बाद उन्होंने पुनः चित्रकला को अपना प्रमुख रचनात्मक माध्यम बनाया।\u003c\/p\u003e\n\u003ch3 style=\"background: #F57C00; color: #ffffff; padding: 12px 18px; border-radius: 6px;\"\u003e📚 यह पुस्तक क्यों पढ़ें?\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eअमोल पालेकर: ए मेमॉयर\u003c\/strong\u003e भारतीय सिनेमा और रंगमंच के एक स्वर्णिम दौर का प्रत्यक्ष साक्ष्य है। यदि आप फिल्मों, थिएटर, कला, आत्मकथाओं या भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक आपको एक महान कलाकार के जीवन, संघर्ष, रचनात्मक दृष्टि और भारतीय मनोरंजन जगत के विकास को बेहद करीब से समझने का अवसर देती है।\u003c\/p\u003e\n\u003c\/div\u003e","brand":"Westland Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45498977091693,"sku":null,"price":899.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0702\/0445\/7069\/files\/81hJX1PSvLL._SL1500.jpg?v=1784913346","url":"https:\/\/the99books.in\/products\/rubber-the-social-and-natural-history-of-an-indispensable-substance","provider":"The 99 Books","version":"1.0","type":"link"}